हर बूँद को सम्हाले रखना पड़ता है

समुंदर हो जाना कोई आसान नहीं


सुकून से है मझधार का हिस्सा मुझमें

किनारों की लहरों को इत्मीनान नहीं


हर दरिया भी सलामत से है मुझमें

यूँ मुझसे मिल जाने में नुकसान नहीं


दिल मेरा सुख कर सहरा हुआ है

मेरी तिश्नगी का किसी को ध्यान नहीं


एक गुल, एक बुलबुल एक गुलिस्तां

एक शहर भी है, सिर्फ तूफ़ान नहीं