प्रसव पीड़ा लिए
मिलो चली औरत
सड़क पर
तपती सड़क पर
माँ बनी
सब जानते हैं
सच यही है,
तुम लाख लीपा पोती
कर लो
पर सच यही है।
पैरो में छाले लिए
चलते रहे मज़दूर
सड़क पर
जलती सड़क पर
कुछ मर गए
सब जानते हैं
सच यही हैं
तुम लाख लीपा पोती
कर लो
पर सच यही है।
सीने से बाहर झांकती
उसकी सारी पसलियां
भूख से
और प्यास से
पर कुछ न मिला
सब जानते हैं
सच यही हैं
तुम लाख लीपा पोती
कर लो
पर सच यही है।
ट्रकों की छतों
पर लदकर
गाड़ियों में छुपकर
अपने गाँव
कुछ पहुंचे
कुछ नहीं
सब जानते हैं
सच यही हैं
तुम लाख लीपा पोती
कर लो
पर सच यही है।
साइकिल खिंचती
पसीना पोछती
कोसों दूर
वो निकल पड़ी
ये बेबसी हैं
रिकॉर्ड नहीं है
सब जानते हैं
सच यही हैं
तुम लाख लीपा पोती
कर लो
पर सच यही है।
ज़मीन पर फेंके
खाने के पैकेट्स
लेने को मज़बूर
हाय ये
मज़दूर
सब जानते हैं
सच यही हैं
तुम लाख लीपा पोती
कर लो
पर सच यही है।
लाठियां खाकर
लाइनों में खड़े
ट्रैन के इंतेज़ार में
कुछ बेसुध पड़े
सब जानते हैं
सच यही हैं
तुम लाख लीपा पोती
कर लो
पर सच यही है।


