दिल को मेरे खाली, कर गया है
वो जो आने को , कहकर गया है
इस कदर भी, कभी बेबसी न हो
शहर में इंसान, भूखा सो गया है
अभी दो चार ही, कदम चले थे
न जाने कैसे दिन ये ढल गया है
करे क्या दिल उसी को चाहता है
कमबख़्त दिल भी ज़िद्दी हो गया है
जो ज़ख़्म भुला दिया था कब का
वो ज़ख़्म और भी गहरा हो गया है
कर दो रोशनी दिल को जलाकर
वक़्त से पहले ये सूरज ढल गया है
साथ जीने की कसम जो दे रहा था
चंद मिनटों में फ़ासला कर गया ह
मर रहे हैं लोग अब भी सड़कों पर
कैसे कह दूं, अंधेरा छंट गया है
