फिर कहाँ याद आते हैं वो

जो छोड़ जाते हैं महफ़िल ए दिल किसी रोज़

ना खुशबू रहती है उनके हाथों की

अपनी हथेलियों पे...

ना दिल धड़कता है उनके ज़िक्र से भी...

कहाँ याद आती है उनकी वो बातें भी

जो कभी कही ही ना गयी हों।

ऐसा कोई गीत भी तो नही बजता कभी दिल की गहराई में...

जिसे सुन कर या गुनगुनाकर उसे याद किया जाए...

कभी नर्म एहसासों को शिद्दत भी नहीं रहती उनके करीब आने की

और फिर कहाँ याद आते हैं वो

जिनके लिए आप किस्सा ए आम हो चुके हों।?