जो बात -बात पर हँसें ,
जो मुस्कुरा कर ग़म पी ले ।
जिसके मन में कोई मैल ना ,
जिसका रक्षक ख़ुद ही शंकर हो ।
तोड़ मरोड़ कर जिसको , वक़्त ने जीना सिखाया हो ।
शब्दों ने जिसको अपना दोस्त बनाया हो ।
रुद्र सा रहकर जिसने , हर प्रहार को झेला हो ।
प्रेम में रहकर जिसने व्योग को ही पाया हो।
शंकर -शंकर जप कर जिसने स्वास को सींचा हो ।
माथे पर उसके शिकंज कैसे आए …..
जिसको भोले ने ख़ुद ही सँवारा हो , जिसका भोले ही सहारा हो ।