आज जब भी पीछे मुड़ कर देखती हूँ
तो यही सोचती हूँ
काश हम मिले होते
भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी से वक़्त निकाल कर
काश हम मिले होते
दो घडी रुक कर
कुछ पल साथ बिताये होते
कुछ किस्से तूने कहे होते
कुछ किस्से मैंने कहे होते
किस्सों किस्सों में मुस्कुराते हुए
तनहाइयों को दूर करते हुए
नज़दीकियों को बढ़ाते हुए
एक दूसरे के करीब आये होते
कुछ पल तो प्यार भरे गुज़ारे होते
कुछ पल तो तेरे संग जी लिए होते
काश हम मिले होते
काश हम मिले होते!!
~ज्योति शर्मा~


