#ख्वाबों से उतरकर मैं हकीकत ही बन जाऊं,

कभी मैं राधिका बनूं कभी मैं रुकमणी बन जाऊं,

मैं करु दर्शन तेरा ही तुझे ही मानूं अपना सब,

कभी सीने से लगा रखूं कभी पलकों पर सजाऊँ!!


तोड़ दूं सारे बंधन मैं न मानूँ रिवाज समाज के,

मैं जानूं तो बस इतना ही प्यार की रस्में आज के,

मैं करुँ सजदा तुम्हारा ही तुमसे मिले दुआएँ नमाज के,

कभी तू आईना बन मेरा कभी बन रुप मेरे साज के!!


चलना साथ मेरे हरदम तुम बनकर के मेरा साया,

मुझे न करना खुद से जुदा न करना कभी पराया,

सर्दियों की धूप बनना तुम मुझे देना कोहरे में उजाला, 

गर्मियों में मैं बन जाऊँगी तेरे लिए शीतल छाया!!


बुने हैं ख्वाब़ हमनें जो मिलकर पुरा करना हैं,

खुशी हो या हो गम हमें हर मुश्किल साथ रहना हैं,

दूरियां न आये कभी भी हमारे दरमियान जानेमन,

दिया और बाती के जैसे एक दूजे के वास्तें जलना हैं!!


-ज्योति गुप्ता