#चाहूं इस कदर तुझको जैसे कोई चाह न पाये,
लिखूं कोई ग़ज़ल तुझ पर जिसे जमाना गुनगुनाये,
ख्वाबों के शहजादों सी नहीं हैं सूरत तुम्हारी,
तु दर्पण हैं हकीकत का मुझे तुझ पर नाज आये!!
तेरी बातों में होती हैं अक्सर प्रेम की कई कसमें,
तेरी आवाज़ सुन के कानों में गुंजें कई नगमें,
चमक हैं तु मेरे चेहरे की तुझसे रौशन हो फिजायें,
तु समुंदर हैं इश्क़ का तुझी में हम डूब जाये!!
-ज्योति गुप्ता


