मुद्दा सिर्फ एक कदम चलने का है

न रुकने का ना थमने का है

मुद्दा सिर्फ एक कदम चलने का है

 

माना राहों में काटें बहुत है, लकिन उनसे लड़ने का हौसला भी बहुत है

कभी गिरे कभी उठे और मुद्दा गिर के उठने के सिलसिले का है

मुद्दा सिर्फ एक कदम चलने का है

 

चली तो चींटी भी थी दीवार पे चढ़ने, गिरी बहुत बार और सम्भली बहुत बार

मुद्दा सिर्फ कोशिश का है, मुद्दा सिर्फ एक कदम चलने का है

 

एक कदम से सौ और सौ से हज़ार क़दाम बनने का मुद्दा है

गिर के सम्भलना और आगे बढ़ने का मुद्दा है

 

मंज़िल पहले भी तेरे पास थी और मंज़िल अब भी उतने ही करीब है तेरे

मुद्दा सिर्फ उससे पाने की चाहत का है

मुद्दा सिर्फ एक कदम चलने का है