इन मद्धम हवाओं में थोड़ी तो सरगोशी रहने दो उन रिश्तों में ही अब तुम गर्मजोशी रहने दो ले जाओ साथ मेरी भी हंसी, रक़ीब को दे देना मेरे चेहरे पर तो अब यही मायूसी रहने दो चीखेंगे चिलायेंगे तो दिल क़तरा-क़तरा होगा हटाओ क़लम, मेरे कमरे में अब ख़ामोशी रहने दो
इन मद्धम हवाओं में थोड़ी तो सरगोशी रहने दो उन रिश्तों में ही अब तुम गर्मजोशी रहने दो ले जाओ साथ मेरी भी हंसी, रक़ीब को दे देना मेरे चेहरे पर तो अब यही मायूसी रहने दो चीखेंगे चिलायेंगे तो दिल क़तरा-क़तरा होगा हटाओ क़लम, मेरे कमरे में अब ख़ामोशी रहने दो