तुमसे दूरी हो तो
सोचता हूँ
इस बार छू लूंगा होंठ
धीरे से चुम लूँगा तेरे
एहसासों को
पर जैसे तुमसे मिलता हूँ
सीने से लगा लेती हो तुम
लगता है बस यही एक एहसास
काफी उम्र भर के लिए
इससे बेहतर सुकून
उस एहसास में नहीं
नहीं, उस सरफिरे से
चाहत में भी नहीं
किसी सर्दी में वो चुभन नहीं
जो तुझसे जुदाई में है
किसी धूप में वो तड़प नहीं
जो तेरी रुसवाई में
और किसी सावन में वो
सुकून नहीं...
जो तेरी जुल्फों से टप टप
टपकती ओस की बूंदों में है