इतनी व्याकुलता से 
ढूंढते रहना तुम!
प्रेम को,

जैसे ढूंढती है 
व्याकुल होकर ,
चुप्पीयाँ 
पंक्तियों को 

पंक्तियां तो खैर मिल ही जाएंगी
चुप्पियों को

पर क्या
तुम प्रेम को ढूंढ पाओगे ?
और मिल भी गया तो
जीवन भर सहेज कल रखना
इतन भी आसान नहीं होगा।

मेरे लिए
तुम्हारे लिए
प्रेम को सहेज कर रखना



~नारायणी