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कैसे करूं मैं परिभाषित कलम को 
क्या हो सकती है भला !!
कलम की भी कोई परिभाषा.......

क्या हम कह सकते हैं उसे, एक सिंगारदान !!

वह समेटे हुए है,अपने भीतर,
विश्व की समुची भाषाओं का सिंगार !!

सोचो ज़रा 
ग़र ना होती कलम 
तो कितने कागज़ 
सूने रह जाते बिना सिंगार के 

हां कलम एक अनूठा सिंगारदान है, मुझे ऐसा लगता है।

~ नारायणी