तुम आना,
ऐसे....
जैसे आती है!
मृत्यु.....
वह आएगी
और
ले जाएगी
हमे अपने साथ
और....
हमारी सारी पीड़ाएं सोंप देगी
अग्नि को .....
बचेगी
तो बस.....
भस्म !
स्मृतियों की भस्म.....
वैसे भी महादेव को यही पसंद है न!
मैं! अपनी पीड़ा से मुक्त हो
शिव में विलिन हो जाऊंगी
जो तुम आओगे
मृत्यु की तरह.....
कहो...
आओगे न!
~ नारायणी
#स्वरचित

