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मरुभूमि


मरुभूमि सी मेरी इन कठोरहथेलियों पर

कुछ बूंदेंक्या गिरीतुम्हारी आंखों सेउग आई इन कठोर हथेलियों पर

हरी मखमली दूब....

— नारायणी
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