धर्म के नाम पर ये अत्याचार क्यों?
बांग्लादेश में हिंदू रो रहे हैं क्यों?
मंदिरों को तोड़ा जाता, घर जलाए जाते क्यों?
बे-गुनाहों का खून बहाया जाता क्यों?
मां का आंचल छीन लिया,
गया पिता का सहारा,
कौन सुनेगा उनकी पुकार,
कौन रोकगा ये संहार?
एकता और भाईचारे का थे नारा लगाते,
अब ये क्या हो रहा है, कहां गए वो वादे?
मानवता कहां खो गई?
कहां दमन इंसानियत हो गई?
आओ मिलकर कदम बनाएं,
एक दुनिया नई बनाएं,
जहां प्यार, शांति, खुशियां हों बुनियाद।
ना धर्म - जाती का हो विवाद ।

