तुम ही तो हों,


अगर मैं लेखक, तो मेरी कहानी

अगर मैं कवि, तो मेरी कविता

अगर मैं शायर, तो मेरी शायरी

तुम ही तो हों।


अगर मैं दिल, तो मेरी धड़कन

अगर मैं शरीर, तो मेरी रुह

अगर मैं नींद, तो मेरा ख्वाब

तुम ही तो हों।


अगर मैं सूर्य, तो मेरा प्रकाश

अगर मैं चांद, तो मेरी चांदनी

अगर मैं पंछी, तो मेरा आसमां

तुम ही तो हों।


मेरे जीने का कारण तुम हो,

मेरी जिंदगी की मंज़िल तुम हो,

मेरी पहली, और आखरी मोहब्बत

तुम ही तो हों।