जिस दिन मैं लिखूंगा उसे

वो दिन खास होगा,

सब कुछ होगा उसके नाम

और मुझे सिर्फ गुनाह होगा ।

खूबसूरती उसकी कुछ ऐसी लिखूंगा

हर लफ्ज़ में इज़्ज़त नफ़्स होगी,

इश्क़ रहेगा अधूरा

कुछ ऐसा हमारा अंज़ाम होगा ।

सरहदें पार होंगी

ये सब झूठ होगा,

इल्ज़ाम जो भी हो

मुझे वो क़बूल होगा ।

वो कहानियां, वो सिलसिले, वो इज़्तेमात

....

वो कहानियां, वो सिलसिले, वो इज़्तेमात

उन सबको याद करूंगा मै,

किसी दिन फुर्सत में

तुझे लिखूंगा मैं ।।