जिस दिन मैं लिखूंगा उसे
वो दिन खास होगा,
सब कुछ होगा उसके नाम
और मुझे सिर्फ गुनाह होगा ।
खूबसूरती उसकी कुछ ऐसी लिखूंगा
हर लफ्ज़ में इज़्ज़त नफ़्स होगी,
इश्क़ रहेगा अधूरा
कुछ ऐसा हमारा अंज़ाम होगा ।
सरहदें पार होंगी
ये सब झूठ होगा,
इल्ज़ाम जो भी हो
मुझे वो क़बूल होगा ।
वो कहानियां, वो सिलसिले, वो इज़्तेमात
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वो कहानियां, वो सिलसिले, वो इज़्तेमात
उन सबको याद करूंगा मै,
किसी दिन फुर्सत में
तुझे लिखूंगा मैं ।।

