एक लड़का है जो रो नहीं पाता

दूसरों की आंखों से बहते आंसु देख

खुद को सुखा रेगिस्तान है पाता

एक लड़का है जो रो नहीं पाता


रहता बंद कमरे में है अंधेरों में है

वो रहता बंद कमरे में है जीता अंधेरों में है

वो रात भर सो नहीं पाता

एक लड़का है जो रो नहीं पाता


ये कुदरत ऐसी है या खुदा की बनावट ऐसी है

ये कुदरत ऐसी है या खुदा की बनावट ऐसी है

कि वह किसी से कुछ कह नहीं पाता

एक लड़का है जो रो नहीं पाता



ऐसी गलती ना कोई खुदा करता है

ये समाज ही है जो उसे नहीं समझता है

कोई है नहीं जो उसके दिल को छू पाता

कोई है नहीं जो उसका दर्द समझ पाता

एक लड़का है जो रो नहीं पाता



कोशिश हर दिन 100 बार करता है

गिर कर संभलता संभल कर फिर चलता है

पर फिर भी वह अपनी मुकाम तक पहुंच नहीं पाता

एक लड़का है जो रो नहीं पाता