देश भक्त सिर्फ वो नही...
देश भक्त सिर्फ वो नही
जो देश पे था मर मिटा
देश भक्त वो भी है
जो देश में पला बड़ा
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कोई सीमा पे रक्त बहा रहा
कोई सीमा में रक्त बचा रहा
रक्त तेरा मेरा लाल है
तो क्यों धर्म में है हम बटे
क्यों जात पात में फंसे
अब सवाल कर जरा
आज उठ तो हो खड़ा
देश भक्त सिर्फ वो नही
जो देश पे था मर मिटा
देश भक्त वो भी है
जो देश में पला बड़ा
कोई सेना में भरती हो गया
कोई पुलिस की खाकी पे था मर गया
सफेद रंग भी तो महान है
किये इसने भी बड़े काम है
गोली ना इसने खाई थी
पर जानें कई बचाई थी
खाकी में हो शहीद तो
वीर वो कहलाता है
सफेद शांति का प्रतिक है
वो गुमनाम ही रह जाता है
मुगलों से थे जब हम लड़े
टुकड़ों में थे हम बट चुके
शासन जब अंग्रेज आया था
तब तक थे हम बिखर चुके
प्रणाम वीर शिवाजी को
नमन रानी लक्ष्मीबाई को
सुखदेव, भगत सिंह, राज गुरु
सलाम लाल, बाल, पाल को
थे मौत से ना जो डरे
देश प्रेम में थे जो मर मिटे
है श्रद्धांजलि बलिदान को
ये देश भक्ति गीत नहीं
है क्रोध जो उफन रहा
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ये देश भक्ति गीत नहीं
है क्रोध जो उफन रहा
माना देश हो गया आज़ाद है
पर अब भी ये गुलाम है
गुलाम दोगले नेताओं का
गुलाम भ्रष्ट समाज का
गुलाम तू, गुलाम मैं
हूं स्वार्थी व्यापारी का
तू देश भक्त बन जरा
भ्रष्टाचार से तो लड़ जरा
सेना का साथ दे जरा
नियम से थोड़ा चल जरा
जैसे बूंद बूंद से भरता है घड़ा
कोशिश तू करके देख जरा
मैं साथ तेरे हूं खड़ा
मैं साथ तेरे हूं खड़ा
.....
देश भक्त सिर्फ वो नही
जो देश पे था मर मिटा
देश भक्त वो भी है
जो देश में पला बड़ा ।।
जो देश में पला बड़ा ।।

