तुम कब बदलोगी?
बदल गई कईं पीढियाँ
गिन ली अब तो 70बरस की सीढियाँ
पहले भी वही धर्म,वही जाति
याद नहीं क्या?
या अंग्रेजों से सीख लीं सब पैंतरेबाजी
कब थमोगी?
इनके संग कितना बढोगी
तामझाम में तुम तो सुकुं से हो
युवा देश के चेहरे पर पङ रही झुरियाँ
सादगी से गुरेज कर
कितना बनोगी और ठनोगी
एक तरफ गरीबी है,लाचारी है
बढती जा रही तंगहाली है
सियासी हृदय ये तुम्हारा
इसमें जनों की पीङा कब भरोगी
सियासत तुम कब बदलोगी
बोलो
तुम कब बदलोगी ??