
मैं जन्म दूं तुम्हें
तुम मेरे होने पर प्रश्नचिन्ह दागना
नौ महीने गर्भ में अंदर तू मेरे
और तू मुझे बोझ मापना
दुनिया देख तू मेरी आँखों से
और तू मेरा दायरा सिमटाना चारदीवारी रखना
ऐसा होता है भारत! तेरे सपूतों की माँ,बहन,बेटी,पत्नी बनना
तेरी प्रतिभा खोजती मैं
तू उन्हीं लकीरों से मेरे लिए लक्ष्मण रेखा छापना...
रोक लेना मेरे कदमों को
बढूं जो आगे,धक्का देना
खींचना मुझे और सबक सिखाना
नज़र पर खुद की यंकी ना हो जब मुझे तू मगर पर्दे में ढापना
अपनी पौरूष की बलाएं लेना
अपनी प्रजाति से मिलकर
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