पता क्या
उनके आने का
पता क्या
उनके जाने का
जब आये
क्षण भर देखा
जब गये
मन भर देखा
कुटिलता
भौचक सी थी
सहजता
औचक सी थी
छल सारा
निष्प्रभ ही रहा
मन उनका
विस्मय में रहा
जो रच गए
वो निश्छल था
जो बच गया
वो विमल ही रहा
अंत ही
अटल सत्य है
आदि ही
वह गंतव्य है
तज गया
वही अनावृत है
स्मृतियों का
एक मंतव्य है
शेष क्या
विशेष ही रहा
अमिट क्या
अवशेष ही रहा

