जब फरवरी का वो इतवार याद आता है ,
हमें मोहब्ब्त का वो इजहार याद आता है ।
उदास होता हूं तो मैं उदासी पढ़ने लगता हूँ ,
फिर नाम 'मुन्नवर' और 'गुलज़ार' याद आता है ।
अब जब बातें करता हूं इससे देर रात तक ,
तब मुझे उस लड़की का प्यार याद आता है ।
मेरी याद में जब उसकी आंखें भर जाती होगी ,
पूछने पर वो कहती होगी मेरा यार याद आता है ।
उदासी के समंदर में इतना डूब गया 'जीतु' ,
जब भी पूछो यही कहता है दिलदार याद आता है ।
©जीतु अणकिया पाली.


