शाम ये आख़िरी जा रही हैं,डगर कल सुनहरी आ रही हैं।कस ले कमर दूर के मुसाफ़िर,जंग जो छेड़ी है तूने वो आगे भी जारी हैं।
शाम ये आख़िरी जा रही हैं,डगर कल सुनहरी आ रही हैं।
कस ले कमर दूर के मुसाफ़िर,जंग जो छेड़ी है तूने वो आगे भी जारी हैं।