व्यक्ति एक है पर सोच अनेक है 

हर सोच के अनेक पहलू है ।


किसी का भला हो सोचू 

किसी का बुरा हो सोचू ।


रिश्ते तो हर हाल मे बनाने है 

बस बनाने के तरीके अपनाने है ।


सोच ही रिश्ते बनाने मे कारगर है 

सोच ही रिश्ते बिगाड़ने मे कारगर है ।


कायम हो राज्य उनकी सोच का 

ऐसा मकसद है उनके प्रचार का ।


यहाँ थोपने मे लगे है अपनी सोच 

कारगर साबित न हुई थोपी सोच ।


लोग बोलते कुछ है सोचते है कुछ

सफल ना हो पाये ऐसे ही लोग कुछ ।


सोच बदलने पर नजरिया बदलता है

और समझ मे आ जाये तो जिन्दगी ।


यहाँ - (कारगर= सहायक)



~ जीतेन्द्र मीना / @Jitendragurdeh