ये कैसा युग आया है 

अश्लीलता को लाया है 

ना लोक-लाज ना शर्म

समाज मे अभी भी भ्रम ।


ये कैसा युग आया है 

नग्नता को लाया है 

समाज सुधारक बन रहे

परोस अश्लील गानें रहे ।


ये कैसा युग आया है 

ना शर्म बेटी मे रही

ना शर्म बेटा मे रही

पिता ने भी लाज खोई ।


ये कैसा युग आया है 

खोयी प्रतिष्ठा समाज ने 

अश्लीलता को अपनाया है

प्रतिष्ठा को खुद ही ठुकराया है ।


ये कैसा युग आया है

अश्लील गायक पैदा हुए

कोई ना करो इनका मान 

बेच दिया खुद का सम्मान ।



- जीतेन्द्र मीना