ये दौर भी आयेगा
सोचा नही था कभी ,
इतनी तबाही,हैरान हूँ
चारों ओर बिलखने की आवाजें ।
अस्पताल मुर्दाघर बने है
सड़के सुनसान पडी है
लोगो मे जबरदस्त घबराहट है
चारों ओर मौत का मंजर है ।
ये दौर भी आयेगा
सोचा नही था कभी ,
देखना पड़ेगा मौतों का नजारा
सुननी पड़ेगी बिलखने की आवाजें ।
गरीब भी न बच पाया
अमीर भी न बच पाया
पैसा यहाँ कुछ न कर पाया
तडप रहे सांसों के लिये ।
ये दौर भी आयेगा
सोचा नही था कभी
बचा नही पाये अपनों को
सुननी पडी बिलखने की आवाजें ।
~ जीतेन्द्र मीना (@jitendragurdeh)


