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रुपए के लिए


रुपया कितना गिराध्यान सबका है,

रुपए के लिएलोग गिर रहे हैउसका क्या ?

रुपए के लिएमानवता गिर रही हैउसका क्या ?

सब अंधे बोटियाबटोरने में लगे है,

रुपए के लिएजो इंसानियत कोमार रहा हैउसका क्या ?

— जीतेन्द्र गुरदह
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