Poetry 1 min read 785K reads

मन ।


मन बडा चंचल हैमन बडा शैतान है ।

सारे झगडों की जड़ ही मन हैसारे कामों की जड़ ही मन है ।

लोग आरोप तो नीयत पर लगाते हैसारे आरोपों की जड़ ही मन है ।

— जीतेन्द्र मीना
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