मै पीछे छोड आया वो 

हँसती खेलती जिन्दगी ।


वो पल ! जो मेरे सबसे हसीन पल थे

बस दो रोटी का गुजारा करने निकला हूँ ।


दो वक्त की भूख बुझाने के लिये

परिवार को पीछे रोता छोड आया हूँ ।


मै एक मजबूर बेबस पिता था

मजदूरी करने घर से निकला हूँ ।


बिवस हूँ बेबस जिन्दगी जीने के लिये 

मै किसी का पिता तो किसी का पति हूँ ।


कमाना पडता है मुझे अपने परिवार के लिये 

साहब ! परिवार को पालने ही तो घर से निकला हूँ ।


मै पीछे छोड आया वो 

हँसती खेलती जिन्दगी ।



- जीतेन्द्र गुरदह