माना बेटियाँ नसीब से होती है , तो 
बेटे भी दुआओं के बाद आते है 
अजी हम लडके है जनाब 
कई जिम्मेदारियों के साथ आते है  ।
आधी उम्र उनको निभाने मे गुजर जाती है तो आधी उनको समझने में,
गुजर जाता है बचपन किताबों में 
और जवानी कमाने में ,
बढ जाती है जिम्मेदारियां उम्र के साथ 
ये बुढ़ापे मे भी कम नही होते ,
कभी बेटा बनकर तो कभी बाप बनकर 
फर्ज निभाना पडता है ,
कभी भरें पेट नखरे तो 
कभी खाली पेट ही सोना पड़ता है ,
कभी बाप की गोद में खेलते है तो 
कभी जिम्मेदारियों के बोझ में,
कभी माँ की गोद मे खेलते है तो 
कभी पेड़ की छांव में,
कभी नौकरी तो कभी शुकून की तलाश मे रहते है ,
हम हर किसी की तकलीफें समझते है 
मगर अपनी तकलीफो का जिक्र तक नही करते ,
हमसे हर कोई उम्मीद करता है 
मगर हमारी ख्वाइशों को कोई नही पूछता ,
दिल टूट भी जाये फिर भी मुस्कुरा लेते है , 
छुप छुप रो लेते है सबसे आँसू छिपाना पडता है ,
हंसने मुस्कुराने का भी दिल नही होता फिर भी मुस्कराहट बनाये रखते है , 
हम हर किसी का घाव भरते है मगर हमारे घाव का कोई मरहम नही ,
अजी कौन कहता है जनाब 
लड़को की जिन्दगी मे गम नही ।।


© जीतेन्द्र मीना ( गुरदह )