कोशिस है मै खुद को जानू 

भीड मे खुद को पहचानू ,

लोग जाने मुझे करीबी से 

ये रिश्ता मिटे गरीबी से ।


कोशिस है मै खुद को जानू

लोगो मे खुद को पहचानू ,

शामिल हुआ भीड मे बेबजह

नही पहचाना खुद को बेबजह ।


कोशिस है मै खुद को जानू

हजारो मै खुद को पहचानू

खुद को जानू कोशिस की बहुत

खंगाले हजारो ग्रंथ मिला ना स्त्रोत ।


कोशिस है मै खुद को जानू

लाखों मे खुद को पहचानू ,

जब याद किया मैने खुद को

तब होश मे ना पाया खुद को ।


कोशिस है मै खुद को जानू

करोडों मै खुद को पहचानू,

जाना लोगो से मैने खुद को

पाया बेसुध ही मैने खुद को ।




- जीतेन्द्र मीना