एक दिन घर से निकला
भलाई शब्द की खोज में
एक छोटे से कोने से
बडे शहरों तक खोजा ।
खोज मे दिन-रात लगा
मगर कुछ हाथ ना लगा
भटकता ही रहा बस मै
कोई ना लगा साथ मै ।
भलाई का नाम सुनते ही
लोग बौखला उठते है
पूछा भलाई के बारे में
लोग मारने दौड़ पडते है ।
देखे चेहरे बहुत मैने
दिखा सिर्फ अपना स्वार्थ
आया कहाँ से शब्द भलाई का
मैने खुद से ही उत्पन्न पाया ।
- जीतेन्द्र मीना


