आदत नही है फिर भी मुस्कुरा लेता हूँ
गमों के बादलों को छुपा लेता हूँ ।
आदत नही है फिर भी हंस लेता हूँ
दुखों को हसकर के छुपा लेता हूँ ।
नही चाहता था दुखों को छुपाना
लोग हसेँगे इसी डर से छुपा लेता हूँ ।
नही चाहता था मै अकेला रहना
लोग मजाक बनायेंगे अकेला रह लेता हूँ ।
मै भी चाहता हूँ खेलना कूदना
बडे है लोग यहाँ अकेला ही कर लेता हूँ ।
मै भी चाहता हूँ लोगो के साथ हंसना
लोग पागल समझेंगे अकेला हंस लेता हूँ ।
- जीतेन्द्र मीना


