By ~ Jitendra kumar jani


गुलज़ार रहें ,बगीचा तुम्हारा,

फुल की तरह , खिलता रहें चेहरा तुम्हारा,


रंग बिरंगी रहें ,खुशियाँ झोली में तुम्हारी,

खुदा से करेंगे, दुआ हम तुम्हारी,


फिर मिलेंगे, यह वादा भी किया था,

तुम यार हो हमारे,

ये हमने कुछ खाली पन्नों पर लिखा था,


पन्ने हम बदलते गये,

यार तुम भी पन्नों की तरह बदल गये,

पन्ने बदलते थे कि तुम्हें हम और अच्छा लिख सके,

यार, तुम्हारे इन्हीं आदतों से हम कभी कभी डर जाते थे,


यार, तुम तो अच्छे हो ,

और कितना अच्छा लिखूँ तुम्हें,

यार, तुम्हारी बातो को याद करके,

हस जाता हूँ,

यह आदत भी गयी नहीं हमे,


तुम्हारा हर रोज मुस्कारा के हाथ मिलाना,

अच्छा लगता था,

सींट पर बैठे बैठे मेरा मन भी तुम्हारा,

इंतज़ार करता था,


जिक्र होता है दोस्ती का,

नाम तुम्हारा आता है,

सिर्फ दोस्त तुझसे ही मिल कर,

मुझे स्वर्ग सा यह जमाना लगता हैं ||