पेट भरने के लिए तिरंगा बेचना पड़ा,
वाह रे गणतंत्र।
सूखा रहने के लिए गीला होना पड़ा,
वाह रे गणतंत्र।
देश की चौकसी के लिए देश ही छोड़ना पड़ा,
वाह रे गणतंत्र।
सच मुँह में रखकर सबके आगे जी हाँ करना पड़ा,
वह रे गणतंत्र।
अधिकार मिलने पर भी उससे वंचित रहना पड़ा।
वाह रे गणतंत्र।
कर्तव्यनिष्ठ होने पर भी वर्णों में रहना पड़ा,
वाह रे गणतंत्र।
बाहर के दुश्मन से लड़ना पड़ा भीतर की अराजकता के लिए,
वाह रे गणतंत्र
सीमा पर शौर्य देखने के लिए परेड को देखना पड़ा।
वाह रे गणतंत्र।
इंसान की कीमत के नाम पर मुआवजों को दिया गया,
वाह रे गणतंत्र।
देशप्रेम के नाम पर बस कपड़ो को पहना गया,
वाह रे गणतंत्र।
सफाई के नाम पर तिरंगे को उठाना पड़ा,
वह रे गणतंत्र।
वाह रे गणतंत्र।