देख लिख दिया है खत मैंने, आखिर लिख दिया है, हर अनकहे जज़्बात को अर्थ दे दिए मैंने, हर शिकायत को ज़ुबान दे ही दी मैंने, देख आज तो मैंने गुस्सा भी दिखा दिया, देख लिख दिया है खत मैंने।। जो कभी कहते न बना मुझसे, देख उन ख़यालों को भी कह दिया मैंने, हर वो सपना जो साथ देखा था, फिर अकेले ही देख लिया मैंने, देख तू मेरा हौसला, तेरे न सुनने पर भी सब कह दिया मैंने। देख लिख दिया है खत मैंने।। देख साथ खत्म होने पर, तुझे दिल में लिए फिरती हूँ, देता तू ब्याज भी नहीं अब, मैं पूरी इमारत तेरे नाम लिखती हूँ, देख तेरे लिए पूरी भाषा को कुरेदा है, मैंने तो हर हर्फ़ में तुझे ही उकेरा है, देख लिख दिया है खत मैंने।। हर मुलाकात को कहानी में संजोया है, मैंने तो अधूरे वादों को बारिशों में भिगोया है, तुझे देखने की तड़प को फिर बादलों में पिरोया है, तेरे न आने की सच्चाई को अब तो धुन्ध में घोला है, देख लिख दिया है खत मैंने, आखिर लिख ही दिया है खत मैंने।। उस खत का पता नहीं मिलता, जा के कहाँ पोस्ट करूँ कोई डाकघर नहीं दिखता, देख अब तो कोई डाकिया भी नहीं आता, बिना पते के घर का कोई वजूद ही नहीं मिलता।। देख लिख दिया है खत मैंने, आखिर लिख ही दिया है खत मैंने!