अमृत है हर बूंद's image
1 min read

अमृत है हर बूंद

Jigyasa SinghJigyasa Singh January 6, 2022
Share0 Bookmarks 17240 Reads0 Likes
रचना: अमृत है हर बूँद 
*******************
बूँद एक टपकी गगन से ।
बूँद एक टपकी नयन से ।।
बूँद का हर रूप मानव, 
को परिष्कृत कर गया।।

बूँद गिरती जब सुमन पे ।
बूँद गिरती जब तपन पे ।।
बूँद का प्रारूप प्रकृति को,
सुसज्जित कर गया ।।

बूँद की भर के अँजूरी ।
बूँद हर पल है

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts