काश तुम समझ पाते, काश तुम्हें भी मेरा इंतज़ार होता,
मेरे संग गुज़ारे हर एक लम्हे का तुम्हें भी अरमान होता,
ख़ैर, कैसे गुजर रही है मेरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ होये बग़ैर,
काश, तुम्हें भी मेरे इस सूनेपन का ज़रा सा ऐहसास होता॥
युँ तो बहुत ख़ुशनुमा सा हूँ मैं सबके साथ,
हँसता खेलता गुनगुनाता भी हूँ सबके साथ,
पर एक कमी सी है मेरे हर लम्हात में, आख़िर,
हँसी तो वो खो ही गयी, जो होती थी बस तेरे साथ॥
और भी बहुत कुछ लिखना चाहता हूँ तेरी ख़ातिर मैं,
पर ये बेग़ाने से अश्क़ रुकने का नाम ही ना ले,
कह सकता ना मैं कुछ तुझे बिलकुल भी,
बस इंतजार की तु मेरे अल्फ़ाज़ ही समझ ले॥
~Jeet


