कुछ विश्वगुरु कहते थे तो कुछ कहते थे इसे सोने की चिडियां

कितनी ही विदेशी शक्तियां आयी पहनाने गुलामी की हथकड़ियाँ,

हर किसी को इसने पनाह दी, हर धर्म को यहाँ था अपनाया

बहुत कुछ खोके भी जिसने अपना वजूद कभी ना गवाया

कुछ इस कदर इस धर्म भूमि ने नाम अपना हिंदुस्तान बनाया!!

 

सनातन धर्म ने जन्म लिया, यही से तो वेदों का था पाठ पढ़ाया,

शल्य का ज्ञान विश्व को देके, मानव जीवन को सुलभ बनाया,

दुनिया को इसने शून्य दिया, इसने ही आयुर्वेद से हमें है मिलवाया,

योग संस्कृति का अभ्यास करवा कर, दुनिया को स्वस्थ बनाया,

कुछ इस कदर इस धर्म भूमि ने नाम अपना हिंदुस्तान बनाया!!

 

बहुतों ने आकर लूटा यहाँ, धर्म को भी थी ठेस पहुंचाई,

विनाश करने इसका थोड़ी सी भी तो कमी ना दिखलाई,

पर, हार गए सब इसकी अखंडता के आगे,

उभर आया बनके ये फिर से विश्व-गुरु,

पा लिया फिर वो सम्मान, जो था थोडा सा धुन्धलाया,

कुछ इस कदर इस धर्म भूमि ने नाम अपना हिंदुस्तान बनाया!!

 

शिवाजी की छत्र-छाया में पला-बढ़ा रहा सदा इसपे प्रताप का साया,

एक आँच ना आने दी आबरू को, सम्पूर्ण भारत में था भगवा लहराया,

रक्त रंजित कर दिया रणभूमि को जब भी प्रश्न अपने सम्मान पे आया,

चौहान के वंशजो ने अपनी ताकत का लोहा पूरी दुनिया में था मनवाया,

कुछ इस कदर इस धर्म भूमि ने नाम अपना हिंदुस्तान बनाया!!

 

विश्व संकट की इस घड़ी में भी,कितनों को सहारा दिया,

जो नहीं कर पाया कोई भी मुल्क, वो इसने सबसे पहले था कर दिखाया,

जब-जब जरुरत पड़ी इस जहां को वहां सबने था खड़ा पाया,

अपनी उदारता का परचम एक बार फिर है इसने लहराया,

कुछ इस कदर इस धर्म भूमि ने नाम अपना हिंदुस्तान बनाया!!!



: - जीत राठौड़