तुम शाख हो
बैशाख हो
तुम घोंसला बनाती हुई चिड़िया का तिनका हो।
तुम रंग हो
तुम ही रूप भी
तुम फूलो से अमृत ले जाती हो।
तुम कली हो
तुम्ही उसकी मखमली हो
तुम वसंत राग गाती हवा हो।
तुम मीन हो,
ओर पंछी हो,
तुम आकाश हो, तुम संसार हो।
ये धरा, प्रेम औेर स्नेह?
तुम स्त्री हो।
