Poetry 1 min read 794.3K reads

मैं


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वे किवाड़ जो बरसो से बंद हैं,वे ख़्वाब जो किवाड़ के अंदर कैद है,वे तकदीर के लिबासजो बक्से के अंदर ही मैले हो चले है,वे दरों दीवार जो धूल से सन चुकी है ,वे सब मैं हूँ।

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