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'निमित्त'


हम कर्म करते हैं ताकि भविष्य में हमें कोई पछतावा ना हो,पर कर्म करना मारे हाथ में हैं?

नहीं..........हम बस 'निमित्त' मात्र हैं।

— जया
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