हम कर्म करते हैं ताकि भविष्य में हमें कोई पछतावा ना हो,पर कर्म करना मारे हाथ में हैं?नहीं..........हम बस 'निमित्त' मात्र हैं।
हम कर्म करते हैं ताकि भविष्य में हमें कोई पछतावा ना हो,पर कर्म करना मारे हाथ में हैं?
नहीं..........हम बस 'निमित्त' मात्र हैं।