सब के मन मे हे ईश्वर अब 

प्रेम कि ज्योति जला देना,

आने जाने वाले पथिको 

को फिर से बतला देना | सब के मन मे....

जगत कि चादर होगयी मैलि,

बस नफरत कि आग है फैली,

शैलि भी अब हूइ बिषैली ,

अमृत को बरसा देना |सब के मन.... ..

भेद भाव के दौर के चलते,

काम क्रोध मदलोभ टहलते,

टहल रहि है  मौत भयानक

दिल का द्वेश मिटा देना| सब के मन मे.......   

कोइ न मानवता अपनाये 

शर्मोहया भी हूए पराए,

ममता भी अब तणप रही है

इसकी प्राण बचा देना| सबके मन मे.......... .

बेटा बाप से है कतराता,

तोण रहा अब दिल का नाता,

नाता दिल का तोण न पाये

ऐसी डोर लगा देना|सबके मन मे...............

फिर से यह संसार वही हो,

सतयुग का व्यवहार वही हो,

राम राज्य हो फिर से वैसा

आके राह दिखा देना|सबके मन मे,,,,,,,,,,