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बिना गुनगुनाएं

बिना गुनगुनाएं,रहा भी न जाएं।।

गम या खुशी हो चाहे,निंदीया सताएं, बिना,,,,

निकलती है आहें भर के,दिल से तरंगें,

सफर चाहें कैसे भी हो , छोटे या लंबे,

कोई याद आएं,या चाहे न आएं,बिना गुनगुनाएं,,,

करम करते अंदर,से हरदम निकलते,

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