फागुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली का त्यौहार कोई धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि एक सामाजिक उत्सव है ,विभिन्न जाति धर्म के लोगों को एक रंग में रंग देने का।
पतझड़ के नीरस मौसम में होली नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।
होली की शुरुआत झांसी जिले से 70 किलोमीटर दूरी पर स्थित एरच नामक गांव से हुई थी ।
एक किंवदंती के अनुसार यही गांव हिरण्यकश्य की राजधानी था। हिरण्यकश्य ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर अपने पुत्र प्रहलद की हत्या का षड्यंत्र रचा ।
लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका को सुरक्षित करने वाली मायावी चुनरी उड़ कर प्रहलाद के ऊपर चली गई। प्रहलाद अग्नि से सुरक्षित निकल आए और होलिका जल गई।
आज भी प्रतिवर्ष यह पवित्र अग्नि बुराई के विनाश और सत्य की जीत के प्रतीक के रूप में जलाई जाती।
भारत में विभिन्न स्थानों पर होली अलग अलग तरीके से मनाई जाती है।
भगवान श्री कृष्ण ने गोपिकाओ संग होली को एक नया ही रूप दे दिया।
ब्रज की होली भारत की सबसे प्रसिद्ध होली है ,बरसाने की लठमार होली भी सदैव से आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र बनी रही।
विभिन्न मिस्ठानो और संगीत से सजा यह त्योहार पूरी दुनिया में भारत की पहचान के रूप में जाना जाता है।
जान्हवी गंगेले


