राफ्तार बढ़ाने में थोड़ा वक्त लग सकता है,
चलना बहुत संभल कर सिखाया गया था ना
पर देखना एक तेज़ दौड़ ले, आ जाऊंगी तुम तक
तुम बस इतना करना, मेरा इंतेज़ार करना
मैं गिर जाऊं तो तुम हाथ ज़रूर देना
पर उठा के कुछ पल बाद छोड़ भी देना
तुम्हारे सहारे पूरा सफर तय नही करना
तुम बस इतना करना साथ चलना
बदन नाज़ुक है ये कब नही माना मैने
जब ज़रूरत पड़े हाथ बटा देना
पर जो कुछ भी खुद करने का बस है, करना है
तुम बस इतना करना हौसला बड़ा देना
है बहुत सी रिवाजों की जंज़ीरें तोड़नी
मदद तुम्हारी भी चाहिए होगी
पर हथौड़ा हिम्मत का मुझे ही चलाना है
तुम बस इतना करना मेरे दामन को गुल की जगह लोहा देना,
अपने वजूद से जुड़ा सब आहिस्ता आहिस्ता सवार लूँगी
राह के काँटों को चुन चुन कर निकाल लुंगी
जब मिले कामयाबी मुझे, पीठ थपथपा देना
तुम बस इतना करना और काटें ना बोने देना।
~ Ayman Jamal