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मैं नि स्वार्थ


पर्णहरित परिवार मेंजन्म लेकर जीता हूंजन्म से ही नि स्वार्थअपने कर्म में होता हूंकर्म क्या है मेराहर बार गिरता औरहर बार उभरता हूं।

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