1 min read 803.1K reads

बेतुके शब्द


कुछ है नहीं बाहर बस ये अन्दर ही अन्दर बिखरा था बाहर सिर्फ स्याही थी .. अन्दर पूरी तबाही थी इतनी सरहदे बाहर न थी , जितनी अंदर दीवारे थी । जिस उलझन से ख्वाहिशे परेशां थी ... वो बाहर बिलकुल अनजान थी ।।

Read more Earn more Learn more